• +91.8958260927
  • info@booknerds.in

“किसी महाकवि ने हमारे जीवन पर एक भी शब्द क्यों नहीं लिखा?” - ओम प्रकाश वाल्मीकि

“बर्दाश्त कर लेने का इतना हौसला था कि आज मैं सोचता हूँ तो हैरान रह जाता हूँ। कितना कुछ छीन लिया है मुझसे इस बर्दाश्त कर लेने की आदत ने!”

“किसी महाकवि ने हमारे जीवन पर एक भी शब्द क्यों नहीं लिखा?” - ओम प्रकाश वाल्मीकि

 30 जून 1950 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फनगर में पैदा हुए ओम प्रकाश वाल्मीकि दलित साहित्य के प्रतिनिधि कलमकार थे ।            

ओम प्रकाश वाल्मीकि का पढ़ाई लिखाई उत्तर प्रदेश और वर्तमान के देहरादून में हुई। उनका बचपन सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संघर्षों से गुजरा। यही अनुभव आगे चलकर उन्हें दलित साहित्यकार के रूप में तराशा। सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कई साहित्यकारों से सम्पर्क किया और लेखन कार्य तथा पठन पाठन शुरू किया।

   

ओम प्रकाश वाल्मीकि दलित साहित्य के मजबूत पुरोधा थे। उन्होंने दलित साहित्य पर अपने “स्वयं वेदना” और अनुभव के आधार पर जोरदार कलम चलाया। कहते है कि ओम प्रकाश जी का मत था कि एक दलित ही दलित के पीड़ा को समझ सकता है। उनकी आत्मकथा “जूठन” उनके इस मत को प्रमाणित करता है। इस आत्मकथा में उन्होंने दलितों और उनकी सामाजिक समस्याओं के ध्यान आकृष्ट किया है। 1997 में प्रकाशित उनकी यह किताब उनके जीवन के प्रारंभिक संघर्षों को बयाँ करती है। यह बताती है कि कैसे एक दलित परिवार का बालक दलित साहित्यकार का मजबूत पैरोकार बना। दरअसल, उनकी यह आत्मकथा दलित चेतना और इसके निर्माण का एक बेहतरीन दस्तावेज है।

ओम प्रकाश वाल्मीकि की कुछ प्रसिद्ध रचनाएँ निम्न है-

कविता संग्रह- सदियों का सन्ताप, बहुत हो चुका, अब और नहीं।

कहानी संग्रह- सलाम, घुसपैठिये, छतरी।

आत्मकथा- जूठन 

नाटक- दो चेहरे, उसे वीर चक्र मिला था।

 सम्मान

1993- डॉ. अम्बेडकर रष्ट्रीय पुरुस्कार

1995- परिवेश सम्मान

2001- कथाक्रम सम्मान

2004- न्यू इंडिया बुक पुरुस्कार

ओम प्रकाश वाल्मीकि की कुछ प्रसिद्ध किताबिन का लिंक नीचे दिया गया है, जिसे आप खरीद सकते है-


बस्स! बहुत हो चुका 

https://amz.run/4jHq


 


घुसपैठिये

https://amzn.to/3wuAvdn


 

जूठन

https://amzn.to/3yLV4DC

सफाई देवता

https://amzn.to/3hUiQql

- सर्वेश कुमार , टीम बुकनर्डस

आप बुकनर्ड्स को फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और यूट्यूब पर भी फॉलो कर सकते है। आप अपनी प्रतिक्रिया भी दे सकते है।

(0) Comment Given by the user.

Please give your Comment

Your Name
Email
Contact no
Your Comment
Thank you for submit your Comment.
Subscribe to our fortnightly newsletter for all the latest bookiesh updates.
THE BOOKNERDS SOCIETY IS A REGISTERED SOCIETY UNDER THE SOCIETY REGISTRATION ACT XXI OF 1860
Design and developed by : Soft2creative